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	<title>Uncategorized Archives - India News Flash</title>
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	<title>Uncategorized Archives - India News Flash</title>
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		<title>कमाल की शख्सियत हैं संदीप चौधरी</title>
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		<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:29:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>एक केले से शुरू हुआ क्रांति का सफर कहानियाँ कई तरह की होती हैं—कुछ प्रेम की, कुछ संघर्ष की, और कुछ ऐसी जो एक छोटी सी इच्छा से शुरू होकर पूरी दुनिया को बदलने का सपना देखती हैं। संदीप चौधरी की कहानी आखिरी वाली है। यह कहानी एक मासूम बच्चे की उस छोटी सी इच्छा से शुरू होती है, जो एक दिन अपने पिताजी से कहता है, “पिताजी, एक केला दिला दो।” जवाब में मिलता है, “अभी नहीं, बाद में।” उस दिन जेब में पैसे थे, लेकिन वो ₹1 का केला उस बच्चे को नहीं मिला। शायद उस पल किसी ने नहीं सोचा था कि यह छोटा सा क्षण एक क्रांति की नींव बनने जा रहा है। आज, संदीप चौधरी न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक मंच पर एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने अपने बचपन के दर्द को वैश्विक उद्देश्य में बदल दिया। Forbes Panama ने उन्हें ठीक ही कहा—“The man turning childhood pain into global purpose.”शुरुआत: एक बच्चे का संकल्पसंदीप चौधरी का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गाँव में हुआ। वहाँ संसाधन सीमित थे, और सपने बड़े। लेकिन उस दिन, जब एक केले की छोटी सी इच्छा अधूरी रह गई, संदीप के मन में कुछ टूटा। यह दर्द केवल एक फल के न मिलने का नहीं था, बल्कि उस भावना का था जो हर बच्चा महसूस करता है—जब उसकी छोटी सी ख्वाहिश को अनसुना कर दिया जाता है। उसी पल संदीप ने ठान लिया कि अब जिंदगी माँगकर नहीं, बल्कि खुद बनाकर जिएंगे। यह संकल्प उनके जीवन का आधार बना, और आज वह दुनिया को दिखा रहे हैं कि एक छोटा सा दर्द कैसे बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है।पहला कदम: टेक्नोलॉजी से मुलाकात1996 में, जब संदीप Bhartiya Central Academy, गुढ़ा गोरजी में पढ़ रहे थे, उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया। उन्होंने पहली बार कंप्यूटर देखा। उस समय कंप्यूटर गाँवों में कोई आम चीज नहीं थी। स्क्रीन पर चलते कर्सर और कीबोर्ड की टक-टक ने उनके मन में एक नई चिंगारी जलाई। उस दिन संदीप ने तय किया कि उनका सफर सिर्फ अपने लिए नहीं होगा—यह उन लाखों लोगों के लिए होगा जो सपने देखते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी में उन्हें दबा देते हैं।उद्यमिता का पहला अध्याय: 1999 से 2012 तकसंदीप की उद्यमी यात्रा 1999 में शुरू हुई, जब उन्होंने अपना पहला स्टार्टअप लॉन्च किया—इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स रिपेयरिंग। यह छोटा सा कदम था, लेकिन इसमें उनकी मेहनत और जुनून का पूरा रंग दिखाई देता था। 2006 में उन्होंने अपनी पहली आईटी कंपनी स्थापित की, जिसने उनके तकनीकी कौशल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 2010 में मिस इंडिया द्वारा उनके शोरूम का उद्घाटन हुआ, जो उनकी बढ़ती पहचान का प्रतीक था। 2012 में DLB Group की स्थापना ने उनके बिजनेस साम्राज्य को और मजबूत किया।2014 में संदीप ने अपने सपनों को वैश्विक मंच पर ले जाकर दुबई में अपनी कंपनी स्थापित की। यह वह दौर था जब संदीप चौधरी का नाम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंजने लगा। 2016 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात ने उनके काम को और भी मान्यता दी।उपलब्धियाँ: 101 स्टार्टअप्स और 23 कंपनियाँआज संदीप चौधरी 101 से ज्यादा स्टार्टअप्स और 23 रजिस्टर्ड कंपनियों के मालिक हैं। यह आंकड़ा केवल उनकी मेहनत और लगन का परिणाम नहीं है, बल्कि उस दृष्टिकोण का भी प्रतीक है जो उन्होंने अपने बचपन में अपनाया था। हर स्टार्टअप, हर कंपनी, और हर प्रोजेक्ट में उनकी वह सोच झलकती है कि सपने सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी होने चाहिए।लेकिन संदीप की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने अपनी सारी उपलब्धियों को एक तरफ रखकर एक नया और बड़ा लक्ष्य चुना—धरती को बचाना। यह वह मोड़ है जो उन्हें बाकियों से अलग करता है।नया मिशन: धरती को हरा-भरा करनासंदीप चौधरी ने अपने सारे बिजनेस और उपलब्धियों को पीछे छोड़कर पर्यावरण संरक्षण को अपना लक्ष्य बनाया। उनका 102वाँ स्टार्टअप एक मल्टीमिलियन-डॉलर ग्रीनटेक वेंचर है, जिसका उद्देश्य न केवल तकनीक को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है, बल्कि धरती के लिए ठोस समाधान पेश करना भी है। उनका सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य है—2040 तक 3000 करोड़ वृक्ष लगाना। यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि एक ऐसी क्रांति का प्रतीक है जो जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और पर्यावरणीय क्षति जैसी वैश्विक समस्याओं से लड़ने के लिए जरूरी है।Forbes Panama ने उनकी इस यात्रा को खूबसूरती से बयान किया—“The man turning childhood pain into global purpose.” संदीप का यह मिशन केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। वे चाहते हैं कि उनकी कहानी हर उस इंसान को प्रेरित करे जो अपने सपनों को छोटा समझता है।प्रेरणा का संदेशसंदीप चौधरी की कहानी हमें सिखाती है कि जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि बड़े इरादों से हासिल होती हैं। एक ₹1 का केला न मिलना उनके लिए केवल एक क्षणिक दर्द नहीं था, बल्कि वह चिंगारी थी जिसने उनके अंदर एक क्रांति को जन्म दिया। आज उनकी यह यात्रा न केवल उन्हें, बल्कि पूरी दुनिया को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा रही है।निष्कर्षसंदीप चौधरी की जिंदगी एक जीवंत सबूत है कि सपने, चाहे कितने छोटे क्यों न हों, दुनिया बदल सकते हैं। एक बच्चे की छोटी सी इच्छा से शुरू हुआ यह सफर आज 101 स्टार्टअप्स, 23 कंपनियों, और एक वैश्विक मिशन तक पहुँच चुका है। उनका 102वाँ ग्रीनटेक वेंचर और 3000 करोड़ वृक्ष लगाने का लक्ष्य न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो अपने दर्द को उद्देश्य में बदलना चाहता है। संदीप चौधरी की कहानी हमें यही सिखाती है—सपने देखो, मेहनत करो, और दुनिया को बेहतर बनाओ। 🌍</p>
<p>The post <a href="https://indianewsflash.com/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa/">कमाल की शख्सियत हैं संदीप चौधरी</a> appeared first on <a href="https://indianewsflash.com">India News Flash</a>.</p>
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 एक केले से शुरू हुआ क्रांति का सफर</p>
<p> कहानियाँ कई तरह की होती हैं—कुछ प्रेम की, कुछ संघर्ष की, और कुछ ऐसी जो एक छोटी सी इच्छा से शुरू होकर पूरी दुनिया को बदलने का सपना देखती हैं। संदीप चौधरी की कहानी आखिरी वाली है। यह कहानी एक मासूम बच्चे की उस छोटी सी इच्छा से शुरू होती है, जो एक दिन अपने पिताजी से कहता है, “पिताजी, एक केला दिला दो।” जवाब में मिलता है, “अभी नहीं, बाद में।” उस दिन जेब में पैसे थे, लेकिन वो ₹1 का केला उस बच्चे को नहीं मिला। शायद उस पल किसी ने नहीं सोचा था कि यह छोटा सा क्षण एक क्रांति की नींव बनने जा रहा है। आज, संदीप चौधरी न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक मंच पर एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने अपने बचपन के दर्द को वैश्विक उद्देश्य में बदल दिया। Forbes Panama ने उन्हें ठीक ही कहा—“The man turning childhood pain into global purpose.”शुरुआत: एक बच्चे का संकल्पसंदीप चौधरी का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गाँव में हुआ। वहाँ संसाधन सीमित थे, और सपने बड़े। लेकिन उस दिन, जब एक केले की छोटी सी इच्छा अधूरी रह गई, संदीप के मन में कुछ टूटा। यह दर्द केवल एक फल के न मिलने का नहीं था, बल्कि उस भावना का था जो हर बच्चा महसूस करता है—जब उसकी छोटी सी ख्वाहिश को अनसुना कर दिया जाता है। उसी पल संदीप ने ठान लिया कि अब जिंदगी माँगकर नहीं, बल्कि खुद बनाकर जिएंगे। यह संकल्प उनके जीवन का आधार बना, और आज वह दुनिया को दिखा रहे हैं कि एक छोटा सा दर्द कैसे बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है।पहला कदम: टेक्नोलॉजी से मुलाकात1996 में, जब संदीप Bhartiya Central Academy, गुढ़ा गोरजी में पढ़ रहे थे, उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया। उन्होंने पहली बार कंप्यूटर देखा। उस समय कंप्यूटर गाँवों में कोई आम चीज नहीं थी। स्क्रीन पर चलते कर्सर और कीबोर्ड की टक-टक ने उनके मन में एक नई चिंगारी जलाई। उस दिन संदीप ने तय किया कि उनका सफर सिर्फ अपने लिए नहीं होगा—यह उन लाखों लोगों के लिए होगा जो सपने देखते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी में उन्हें दबा देते हैं।उद्यमिता का पहला अध्याय: 1999 से 2012 तकसंदीप की उद्यमी यात्रा 1999 में शुरू हुई, जब उन्होंने अपना पहला स्टार्टअप लॉन्च किया—इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स रिपेयरिंग। यह छोटा सा कदम था, लेकिन इसमें उनकी मेहनत और जुनून का पूरा रंग दिखाई देता था। 2006 में उन्होंने अपनी पहली आईटी कंपनी स्थापित की, जिसने उनके तकनीकी कौशल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 2010 में मिस इंडिया द्वारा उनके शोरूम का उद्घाटन हुआ, जो उनकी बढ़ती पहचान का प्रतीक था। 2012 में DLB Group की स्थापना ने उनके बिजनेस साम्राज्य को और मजबूत किया।2014 में संदीप ने अपने सपनों को वैश्विक मंच पर ले जाकर दुबई में अपनी कंपनी स्थापित की। यह वह दौर था जब संदीप चौधरी का नाम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंजने लगा। 2016 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात ने उनके काम को और भी मान्यता दी।उपलब्धियाँ: 101 स्टार्टअप्स और 23 कंपनियाँआज संदीप चौधरी 101 से ज्यादा स्टार्टअप्स और 23 रजिस्टर्ड कंपनियों के मालिक हैं। यह आंकड़ा केवल उनकी मेहनत और लगन का परिणाम नहीं है, बल्कि उस दृष्टिकोण का भी प्रतीक है जो उन्होंने अपने बचपन में अपनाया था। हर स्टार्टअप, हर कंपनी, और हर प्रोजेक्ट में उनकी वह सोच झलकती है कि सपने सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी होने चाहिए।लेकिन संदीप की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने अपनी सारी उपलब्धियों को एक तरफ रखकर एक नया और बड़ा लक्ष्य चुना—धरती को बचाना। यह वह मोड़ है जो उन्हें बाकियों से अलग करता है।नया मिशन: धरती को हरा-भरा करनासंदीप चौधरी ने अपने सारे बिजनेस और उपलब्धियों को पीछे छोड़कर पर्यावरण संरक्षण को अपना लक्ष्य बनाया। उनका 102वाँ स्टार्टअप एक मल्टीमिलियन-डॉलर ग्रीनटेक वेंचर है, जिसका उद्देश्य न केवल तकनीक को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है, बल्कि धरती के लिए ठोस समाधान पेश करना भी है। उनका सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य है—2040 तक 3000 करोड़ वृक्ष लगाना। यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि एक ऐसी क्रांति का प्रतीक है जो जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और पर्यावरणीय क्षति जैसी वैश्विक समस्याओं से लड़ने के लिए जरूरी है।Forbes Panama ने उनकी इस यात्रा को खूबसूरती से बयान किया—“The man turning childhood pain into global purpose.” संदीप का यह मिशन केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। वे चाहते हैं कि उनकी कहानी हर उस इंसान को प्रेरित करे जो अपने सपनों को छोटा समझता है।प्रेरणा का संदेशसंदीप चौधरी की कहानी हमें सिखाती है कि जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि बड़े इरादों से हासिल होती हैं। एक ₹1 का केला न मिलना उनके लिए केवल एक क्षणिक दर्द नहीं था, बल्कि वह चिंगारी थी जिसने उनके अंदर एक क्रांति को जन्म दिया। आज उनकी यह यात्रा न केवल उन्हें, बल्कि पूरी दुनिया को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा रही है।निष्कर्षसंदीप चौधरी की जिंदगी एक जीवंत सबूत है कि सपने, चाहे कितने छोटे क्यों न हों, दुनिया बदल सकते हैं। एक बच्चे की छोटी सी इच्छा से शुरू हुआ यह सफर आज 101 स्टार्टअप्स, 23 कंपनियों, और एक वैश्विक मिशन तक पहुँच चुका है। उनका 102वाँ ग्रीनटेक वेंचर और 3000 करोड़ वृक्ष लगाने का लक्ष्य न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो अपने दर्द को उद्देश्य में बदलना चाहता है। संदीप चौधरी की कहानी हमें यही सिखाती है—सपने देखो, मेहनत करो, और दुनिया को बेहतर बनाओ। 🌍</p>
<p>The post <a href="https://indianewsflash.com/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa/">कमाल की शख्सियत हैं संदीप चौधरी</a> appeared first on <a href="https://indianewsflash.com">India News Flash</a>.</p>
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		<title>मनुष्य शरीर पाने का असली फल भगवत भजन मे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Apr 2025 10:51:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मनुष्य शरीर पाने का असली फल भगवत भजन मे-सत्संगी सवाई सिह श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर (तोलाराम मारू) सदेव सत्संग भजन भाव मे अपने जीवन के लगभग सौ वर्ष पूर्व करने वाली तोलाराम मारू की माताजी की भावनानुसार सत्संग का विशाल आयोजन किया गया। तोलाराम मारू की माताजी स्वयं सत्संग मे निरन्तर सेवा भाव से बाणी भजनो को सत्संगी भाई बहनों को सुनाती रहती। सत्संगी भाई बहन बोलचाल में मंडलेश्वर नाम से पुकारते हैं । श्रीडूंगरगढ़ के आडसरबास मे गुरू कृपा आवास पर प्रात 10 बजे से साय तक भजन सत्संगी श्रीसवाई सिह मंडली आसलसरबास समिति द्वारा भजनो की प्रस्तुतियां दी गई, तथा भजनो का भाव भी बताया गया। मनुष्य शरीर पाने का असली फल भगवत भजन मे है। इस विषय पर चर्चा की गई। इस सत्संग में विश्वकर्मा कोशल विकास बोर्ड अध्यक्ष राज्य मंत्री रामगोपाल सुथार राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधिपति हिमतराम पवार भीलवाड़ा के जिला सेशन न्यायाधीश शकर लाल राजस्थान हाईकोर्ट के डबल एजी राजेश कुमार पंवार जोधपुर के प्रतिष्ठित व्यवसाई पारस भाटी सेरूणा के सरपंच प्रतिनिधि भरतसिह राठौड़ रतनगढ़ से हरिप्रसाद पंकज कुमार हर्षवाल एडवोकेट पूनमचंद मारू, भींयाराम गुरूजी, ओमप्रकाश दर्जी, भाई मालाराम, जसवंत सिंह राठौड़, ओंकार दास स्वामी, तोलाराम व्यास, श्रीडूंगरगढ़ के अलावा दूर-दूर से सत्संगी भाई बहन भी आये। कालू बास मे प्रतिदिन पाना देवी सत्संग भवन मे सत्संग कराने वाले मधुर वाणी में भजन बाणी गायक मोतीलाल व्यास, सत्संगी भाई सादु्र्ल सिह, पोकरराम शर्मा,भगवानाराम,दुलाराम धनेरवा,देश बंधू, शुभकरण डाकलिया, सुगणा देवी भादू, राधेश्याम रायपुर, गोपाल,शिव कुमार सेन,किशनलाल धाधल, फूसाराम धनेरवा, सत्संगी नारायणी भगवती देवी शर्मा के अलावा विकलांग नेत्रहीन सत्संगी ने भी दूसरो का सहारा लेकर आकर सत्संग का आनन्द लिया। गुणी जन सम्मान समारोह से सम्मानित लुणाराम नाई,मघाराम सुथार आसाराम सुथार, गोपाल सिंह राजपुरोहित, किशनसिंह राजपुरोहित, शंकरलाल शर्मा गुरूजी ने भी बहुत सारगर्भित भजनों की प्रस्तुतियां दी,उपस्थित सभी जन का हृदय गदगद हो गया।। उपस्थित काफी सत्संगी भाई बहन का कहना था कि ऐसी सत्संग तो निरन्तर ही मिलती रहे।</p>
<p>The post <a href="https://indianewsflash.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ab/">मनुष्य शरीर पाने का असली फल भगवत भजन मे</a> appeared first on <a href="https://indianewsflash.com">India News Flash</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>मनुष्य शरीर पाने का असली फल भगवत भजन मे-सत्संगी सवाई सिह </p>
<p> श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर<br />
 (तोलाराम मारू)</p>
<p>सदेव सत्संग भजन भाव मे अपने जीवन के लगभग सौ वर्ष पूर्व करने वाली तोलाराम मारू की माताजी की भावनानुसार सत्संग का विशाल आयोजन किया गया। तोलाराम मारू की माताजी स्वयं सत्संग मे निरन्तर सेवा भाव से बाणी भजनो को सत्संगी भाई बहनों को सुनाती रहती।<br />
 सत्संगी भाई बहन बोलचाल में मंडलेश्वर नाम से पुकारते हैं । श्रीडूंगरगढ़ के आडसरबास मे गुरू कृपा आवास पर प्रात 10 बजे से साय तक भजन सत्संगी श्रीसवाई सिह मंडली आसलसरबास समिति द्वारा भजनो की प्रस्तुतियां दी गई, तथा भजनो का भाव भी बताया गया।</p>
<p> मनुष्य शरीर पाने का असली फल भगवत  भजन मे है। इस विषय पर चर्चा की गई। इस सत्संग में विश्वकर्मा कोशल विकास बोर्ड अध्यक्ष राज्य मंत्री रामगोपाल सुथार राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधिपति हिमतराम पवार भीलवाड़ा के जिला सेशन न्यायाधीश शकर लाल राजस्थान हाईकोर्ट के डबल एजी राजेश कुमार पंवार जोधपुर के प्रतिष्ठित व्यवसाई पारस भाटी सेरूणा के सरपंच प्रतिनिधि भरतसिह राठौड़ रतनगढ़ से हरिप्रसाद पंकज कुमार हर्षवाल एडवोकेट पूनमचंद मारू, भींयाराम गुरूजी, ओमप्रकाश दर्जी, भाई मालाराम, जसवंत सिंह राठौड़, ओंकार दास स्वामी, तोलाराम व्यास, श्रीडूंगरगढ़ के अलावा दूर-दूर से सत्संगी भाई बहन भी आये।<br />
कालू बास मे प्रतिदिन पाना देवी सत्संग भवन मे सत्संग कराने वाले मधुर वाणी में भजन बाणी गायक मोतीलाल व्यास, सत्संगी भाई सादु्र्ल सिह, पोकरराम शर्मा,भगवानाराम,दुलाराम धनेरवा,देश बंधू, शुभकरण डाकलिया, सुगणा देवी भादू, राधेश्याम रायपुर, गोपाल,शिव कुमार सेन,किशनलाल धाधल,  फूसाराम धनेरवा, सत्संगी नारायणी भगवती देवी शर्मा के अलावा विकलांग नेत्रहीन सत्संगी ने भी दूसरो का सहारा लेकर आकर सत्संग का आनन्द लिया। गुणी जन सम्मान समारोह से सम्मानित लुणाराम नाई,मघाराम सुथार आसाराम सुथार, गोपाल सिंह राजपुरोहित, किशनसिंह राजपुरोहित, शंकरलाल शर्मा गुरूजी ने भी बहुत सारगर्भित भजनों की प्रस्तुतियां दी,उपस्थित सभी जन का हृदय गदगद हो गया।। उपस्थित काफी सत्संगी भाई बहन का कहना था कि ऐसी सत्संग तो निरन्तर ही मिलती रहे।</p>
<p>The post <a href="https://indianewsflash.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ab/">मनुष्य शरीर पाने का असली फल भगवत भजन मे</a> appeared first on <a href="https://indianewsflash.com">India News Flash</a>.</p>
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